Two Poems by Renu Mishra

Two Poems by Renu Mishra

Quarantine

जब लोग व्यथित थे 
और कर रहे थे चीख पुकार
तोड़ने quarantine को 
हर पल थे बेकरार
कैद अपने घर में 
घूमने को थे परेशान
देख मुझको आश्चर्य हुआ था
मुझे कोई फ़र्क इससे न पड़ा था
मेरे लिए ये कुछ भी नहीं नया था
बरसों से खुद को quarantine में रखा था
दुनिया से मेरा कभी नहीं बना था 
मैं भी मनुष्यों से रहती थी भयभीत 
खुद को खुद में समेट करती थी दिन व्यतीत
अब जब वो हो गये हैं कैद 
तो कर लिया  उनमुक्त खुद को 
थी मैं आजाद कर quarantine में सबको
पंछियों फूलों नदियों हवाओं से थी दोस्ती मेरी
मन वहीं रमता था प्रकृति संग बनती थी मेरी
सीखा था मैंने पंछियों से  मुक्त रहना
देह को छोड़ हवाओं संग सैर करना 
छू आती थी आकाश 
लहरों पर सवारी करती थी
जंगलों में खो झरनों में नहाया करती थी
फूलों संग बतियाती थी 
गीली रेत पर चला करती थी
चांदनी में हो सराबोर रातरानी संग चहकती थी
सीख लिया था मन ने खुद को आजाद रखना
शरीर से अलग अपनी पहचान रखना
मन मेरा अलमस्त गाता था गुनगुनाता था
उसको कहां कोई बंधन बांध पाता था
वह आजाद उनमुक्त 
अपनी पहचान पाया था
 
 
अधूरी बातें
 
कुछ अधूरी बातें
अधूरी रातें
अधूरे रास्ते 
अधूरी मुलाकातें
अधूरा साथ
अधूरा इंतज़ार
सोचती हूं 
कुछ तो मुकम्मल कर लूं
इस इंतजार को तिलांजलि दे दूं
हर अधूरी बात को बिसरा 
खालीपन ही पूरा कर‌ लूं 
कब तक आधे अधूरे पन के सहारे
अधूरी मंजिलों की बाट जोहूं‌
इन रास्तों को ही विदा कर दूं
हर अरमान बुहार दूं 
शून्यता को पूर्णता दे दूं
खुद की नई परिभाषा लिख दूं
हर अधूरापन यूं पूरा कर‌ लूं 

डॉ रेणु मिश्रा सामाजिक,सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय,सोशल एक्टिविस्ट, कवयित्री एवं रसायन शास्त्र की पूर्व प्रवक्ता हैं तथा गुरुग्राम में स्थित हैं। इनके चार काव्य-संग्रह,”ख़्वाबों के परिंदे”, “बनफूल”   “मन के मनके”एवं”दो टूक” हैं।

इनके साठ से भी अधिक साझा काव्य प्रकाशित हो चुके हैं ।इनकी कविताएँ देश विदेश की अनेक पत्र पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। 
 डॉ रेणु मिश्रा को साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए “काव्य गरिमा पुरस्कार, Wordsmith extraordinare “Pride of India-2019″,Pride of Women award -2019” एवं अन्य कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

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